25 January 2016

ग़ज़ल - लौटती हर सदा बताती है


लौटती हर सदा बताती है
आसमां तक पुकार जाती है

एक तस्वीर पर्स में मेरे
देखता हूँ तो मुस्कुराती है

क्यूँ ये दिल मुँह फुलाये बैठा है?
एक धड़कन इसे बुलाती है

प्यार की एक दुखती रग दिल को
हाँ, बहुत ज़ोर से दुखाती है

मुझ पे ठहरी निगाह इक तेरी
कोई मंतर सा बुदबुदाती है

हम हक़ीक़त से मिल नहीं पाते
उम्र ख़्वाबों में बीत जाती है

साथ अपनों के जब भी होता हूँ
ज़िन्दगी क्यूँ मुझे डराती है

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Pebble Art by Sharon Nowlan

30 November 2015

ग़ज़ल - हर इक साँचे में ढल जाये ज़रा ऐसे पिघल प्यारे


हर इक साँचे में ढल जाये ज़रा ऐसे पिघल प्यारे
तू अपनी सोच के पिंजरे से बाहर तो निकल प्यारे 

झुकायेगा नहीं अब पेड़ अपनी शाख पहले सा 
तेरी चाहत अगर ज़िद्दी है तो तू ही उछल प्यारे 

पस-ए-हालात में ख़ामोशियाँ भी चीख उट्ठी हैं 
रगों में गर लहू बहता है तेरे तो उबल प्यारे 

जहाँ फ़रियाद गुम होने लगे आवाज़ में अपनी 
वहाँ पर टूटने ही चाहिये सारे महल प्यारे 

निवाला आज भी मुश्किल से मिलता है यहाँ लेकिन 
फले-फूले हैं हाथी, साइकिल, पंजा, कमल प्यारे 

है अहल-ए-शहर का लहजा न जाने तल्ख़ क्यूँ इतना 
सुनाना चाहता हूँ मैं यहाँ बस इक ग़ज़ल प्यारे 

13 September 2015

ग़ज़ल - ख़ुश्क निगाहें, बंजर दिल, रेतीले ख़्वाब


वक़्त तेरे जब आने का हो जाता है
दीवाना… और दीवाना हो जाता है

आँखें ही फिर समझौता करवाती हैं
नींद से जब मेरा झगड़ा हो जाता है

ख़ुश्क निगाहें, बंजर दिल, रेतीले ख़्वाब
देख मुहब्बत में क्या-क्या हो जाता है

एक ख़याल ख़यालों में पलते-पलते
रफ़्ता-रफ़्ता अफ़साना हो जाता है

चंद बगूले यादों के उड़ते हैं और
धीरे-धीरे सब सहरा हो जाता है