04 August 2009

राजस्थान में गुज़रे कुछ हसीं पल......

राजस्थान जाने का अवसर मिलना मेरे लिए एक खास बात थी क्योंकि इससे पहले मैं कभी वहां गया नही था और काफी तमन्ना थी इसे करीब से देखने की जो पूरी हुई मैंने ऑफिस के काम के साथ-साथ घूमने का कोई मौका नही गवाया और काम से फुर्सत मिलते ही निकल पड़ता था उस जगह की प्रसिद्ध स्थानों को देखने राजस्थान में जयपुर, चित्तोर, उदयपुर, जोधपुर और अजमेर को देखने का सौभाग्य मिला
"दाल भाटी चूरमा" का स्वाद भूल नही सकता, "मिर्च बड़ा" और "मावे की कचोरी" के क्या कहने (लिखते हुए भी मुंह में पानी आ रहा है)। जाने से पहले नीरज जी से कुश जी का नम्बर लिया, पहचान गए ना........कुश की कलम वाले, और वहां मैंने उन्हें बिना देरी किए कॉल लगा दी, मगर मैं तो उन्हें जानता था पर वो मुझे नही। एक अनजान शख्स से कॉल और मुलाक़ात की बात उन्हें कुछ अजीब सी लगी मगर नीरज जी के नाम ने मेरी एक पहचान करा दी और मुलाक़ात का वक्त क्रिस्टल पाम में मुक़र्रर हुआ।
कुश जी ने जयपुर के एक और ब्लॉगर सय्यद जी को भी बुला लिया सोने पे सुहागा। सय्यद जी लविज़ा नाम से अपना ब्लॉग लिखते हैं जो उनकी नन्ही परी(बिटिया) का नाम है और उसकी शरारतों को अपने लफ्ज़ देते हैं। दोनों का साथ मेरे लिए कुछ अनमोल था और वो गुज़रे लम्हें एक हसीं याद बन गए। बातों ही बातों में कई बातें निकली और वक्त कब छू हो गया पता ही नही चला।
कुछ घूमी जगह के चित्र छोड़ जा रहा हूँ आपके लिए...................

(ये है चित्तोर किले में वो जगह जहाँ पे रानी पद्मावती ने जोहर किया था)


(ये है कृष्ण दीवानी मीरा जी का मन्दिर)

(ये है शीश महल चित्तोर दुर्ग में)

(मुझे तो पहचान ही गए होंगे)

अब जल्द ही उत्तर प्रदेश जाना है, देखिये किस-किस से मुलाक़ात होती है।


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