11 August 2008

खाई हैं ठोकरें....

खाई हैं ठोकरें तभी तो सम्हला हूँ आगे।
लड़ा हूँ ज़माने से और निकला हूँ आगे।

मुझको मुश्किलों ने बना तो दिया पत्थर,
जज़्बात जब कभी भी छुए पिघला हूँ आगे।

04 August 2008

ग़ज़ल - रात दिन ख़यालों में इक अजब खुमारी है

रात दिन ख़यालों में इक अजब खुमारी है।
नींद हमसे रूठी है, करवटों की क्यारी है।

जैसे तुम नज़र में हो, जिंदगी में आ जाओ,
राह तेरी देखे जो रूह वो बेचारी है।

ढूँढता क्यों रहता है, ख़ुद को मेरी आंखों में,
तेरे बारे में कहती हर ग़ज़ल हमारी है।

24 March 2008

ग़ज़ल - अब तलक मेरा रहा अब आपका हो जाएगा

बहरे रमल मुसमन महजूफ
२१२२-२१२२-२१२२-२१२

अब तलक मेरा रहा अब आपका हो जाएगा।
इस दिवाने यार दिल का कुछ पता हो जाएगा।

तू अगर चाहे तो तुझको मैं भुला दूँगा मगर,
है जो वादा धड़कनों से वो दगा हो जाएगा।

आज की ये ज़िन्दगी अब ताजगी खोने लगी,
याद कर बातें पुरानी सब नया हो जाएगा।

दिल जिगर में, धड़कनों में, रूह में तू बस गई,
बिन तिरे जीना बड़ा मुश्किल मिरा हो जाएगा।

इश्क में यारों ने हिम्मत तो बड़ा दी है "सफर",
सामने जब वो रहंगे सब हवा हो जाएगा।