आप सबको मेरा नमस्कार................
काफी दिनों के बाद एक ग़ज़ल लगा रहा हूँ, कुछ व्यस्तताओं में घिरा हुआ था मगर अब कोई शिकायत का मौका नही दूंगा।
बहरे रमल मुसद्दस महजूफ (२१२२-२१२२-२१२)
काफी दिनों के बाद एक ग़ज़ल लगा रहा हूँ, कुछ व्यस्तताओं में घिरा हुआ था मगर अब कोई शिकायत का मौका नही दूंगा।
बहरे रमल मुसद्दस महजूफ (२१२२-२१२२-२१२)
अब के जब सावन घुमड़ कर आएगा।
दिल पे बदली याद की बरसाएगा।
.
मन से अँधियारा मिटेगा जब, तभी
अर्थ दीवाली का सच हो पायेगा।
.
दूसरे की गलतियाँ तो देख ली,
ख़ुद को आइना तू कब दिखलायेगा।
.
अपने बारे में किसी से पूछ मत,
कोई तुझको सच नही बतलायेगा।
.
धुन में अपनी चल पड़ा पागल सा है,
दर बदर अब मन मुझे भटकायेगा।
.
गर्दिशों में छोड़ देंगे सब तुम्हे,
प्यार माँ का संग चलता जाएगा।
.
वोट जब मन्दिर के मुद्दे पर मिलें,
कौन मुदा भूख का भुनवायेगा।
.
खिलखिला कर कैसे हँसतें हैं भला,
अब तो बच्चा ही कोई सिखलाएगा।
.
ये जो हैं आतंकवादी जानवर,
कौन मानवता इन्हे सिखलाएगा।
.
तीन रंगों पर लगेगा दाग एक,
भूख से बच्चा जो चूहे खायेगा।
.
हम भी सुन कर के चले आए "सफ़र",
आज वो गज़लें हमारी गायेगा.
(गुरु जी के आशीवाद से कृत ग़ज़ल)