05 October 2008

ग़ज़ल - तू यकीन मेरा है, मैं यकीन तेरा हूँ

भूख प्यास जिंदा है सब के ही निवालों में।
पत्तलों में हो या सोने के राज थालों में।


तू यकीन मेरा है, मैं यकीन तेरा हूँ,
हम उलझ गए दोनों बेवजह सवालों में।


दीप वो लड़े शब से जान डाल जोखिम में,
भूल सब गए हम वो सुबह के उजालों में।


दौड़ता है रग-रग में खू नया उमंगों का,
तुम भरो मसाला ये सत्य की मशालों में।
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