02 October 2008

बापू के लिए ...............

वक्त की सिलवट में रहे माज़ी की खुशबू।
आज भी ताज़ा सी है, आज़ादी की खुशबू।
महकता है हिंदोस्ता, जब महकती है,
अनगिनत वीरों और एक गाँधी की खुशबू।
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