08 October 2008

ग़ज़ल - चंदा मामा कांच की कटोरी कहाँ हैं?

चंदा मामा कांच की कटोरी कहाँ हैं?
रहती थी जो हर जुबां पे लोरी कहाँ हैं?

झूठी लगती हैं अनाज सड़ने की बातें,
लाला सच को बोल दो वो बोरी कहाँ हैं?

रहते हैं अब मॉम डैड सब की जुबां पे,
अब वो बाबा और मैय्या मोरी कहाँ हैं?

उलझे इतने हैं सभी किताबों में आजकल,
उस बचपने नादान की वो चोरी कहाँ हैं?

रह के तेरे साथ ग़म खुशी को जिया है,
तुमने छोड़ी हमने भी बटोरी कहाँ हैं?
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