18 October 2008

ग़ज़ल - जो है ग़लत उसका इंक़लाब करता है..

जो है ग़लत उसका इंक़लाब करता है।
तुम ही बताओ वो क्या ख़राब करता है।
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एक बात छोटी सी तुम दिमाग में रखना,
मुश्किल में ही इंसा लाजवाब करता है।
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करते रहो नेकी और बढ़ चलो आगे,
कोई भला क्या गिन के सबाब करता है।
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मुझसे निगाहें मिल के निगाह का झुकना,
तेरी अदाओं को कामयाब करता है।
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कोई मुहब्बत में ख़त कहीं जलाता है,
कोई कहीं उनको इक किताब करता है।
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