20 November 2008

ग़ज़ल - सबका अपना अपना कहना

सबका अपना, अपना कहना।
कहते रहना, कहते रहना।
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ये कश्ती ही जाने है बस,
किस जानिब है उसको बहना।
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बात पता ये मुझको ना थी,
बिन तेरे है मुश्किल रहना।
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दिल में जो हैं दर्द पुराने,
वो चाहे बस दिल में रहना।
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सोच यही माँ बेचे जेवर,
मेरे बच्चे मेरा गहना।
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झूठ बड़ा होने से पहले,
लाजिम है फ़िर सच को कहना।
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बाबा ने एक बात सिखाई,
बेटा आगे बढ़ते रहना।
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